शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

जाग उठा अंदर का मौसम, अब तक था जो अँखियाँ मूंदे

(फोटो गूगल से साभार) 


लगा सुनाने बारिश का पानी
भीत छुपी थी कोई कहानी
बहने लगा है संग संग जिसके
यादें जो हो चुकी पुरानी
छप्पक छईं पानी में उतरा कोई  
लौट आई फिर अल्हड़ जवानी 
रूठे पिया को चला मनाने, भीग रहा मन मीत वही ढूंढें 
जाग उठा अंदर का मौसम, अब तक था जो अँखियाँ मूंदे 

धमक धमक बादल हैं गरजे
चमक चमक बिजली है चमके
काली चादर ओढ़े अम्बर
खोल रहीं हैं मन की परतें 
सिली सिली सी दिल की अंगराई
चेहरे पर इक मुस्कान है लाई
पिया के होने का अहसास, धरती अम्बर इक डोर में गूंदे   
जाग उठा अंदर का मौसम, अब तक था जो अँखियाँ मूंदे 


डाली डाली, पत्ता पत्ता 
वसुधा का अंग अंग है भीगा
काली कजरारी आँखों में
प्रेम का सुन्दर रंग है दिखा
सुर्ख भीगे अधरों पर 
नाम प्रीत का आकर टिका
अम्बर सा विस्तार पिया, साकार होती दिल की उम्मीदें  
जाग उठा अंदर का मौसम, अब तक था जो अँखियाँ मूंदे 


गुरुवार, 29 सितंबर 2016

टूट कर गिर जाएगा आसमां यह किसने कह दिया

(फोटो गूगल से साभार)


कुछ लोग बिहार को बहुत ही निम्न दृष्टि से देखते हैं और गाहे बगाहे कुछ ऐसे बयान दे जाते हैं जो काफी दुखदायी होता है।  आज बिहार की वर्तमान स्थिति भले उतनी अच्छी नहीं हो लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हमेशा ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी।  समय के साथ सब बदलता है  और बिहार में भी सकारात्मक बदलाव आएँगे ऐसी मेरी आशा है।  दोस्तों मेरा पूर्ण विश्वास है कि एक समय आएगा जब लोग दिल से बोलेंगे कि 'बिहार है तो बहार है' :-)


अस्त हुआ सूरज कभी उगता नहीं 
यह किसने कह दिया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 

बुद्ध महावीर की धरा 
ज्ञान की मशाल जला 
जिसने विश्व को शून्य दिया
जिसके ऊपर विज्ञान चला 
विश्व कटोरे में जिसने 
ज्ञान अमृत भर दिया  
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 

विश्व विजेता सिकंदर की 
जहाँ रूहें काँप उठी
बिन लड़े ही जहाँ हारा वो 
चंद्रगुप्त की यह वीर भूमि 
वीर कुंवर सिंह जैसे अदम्य वीर ने  
जहाँ अंग्रेजों को धूल चटाया 
आजादी के शंखनाद को 
गांधी ने जहाँ आवाज उठाया  
यह अपराजित धरा 
अपराजेय ही रह गया  
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 

जिसने राष्ट्र को अपना 
पहला राष्ट्रपति दिया 
पहली लोकतंत्र की नींव  
जिस धरा पर रखा गया  
लोकनायक जयप्रकाश 
कर्पूरी की जन्मभूमि को
हर कोई नमन कर गया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया

ऐसे अनगिन गाथाएं 
क्या क्या अब हम गिनाएँ 
जिसने देश के गौरव में 
जाने कितने चाँद लगाए
उस गौरवशाली धरा पे 
हम गौरवान्वित हुए जाएं
दिल से हर कोई जिसको 
कई सलामी दे गया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया

अस्त हुआ सूरज कभी उगता नहीं 
यह किसने कह दिया 
टूट कर गिर जाएगा आसमां 
यह किसने कह दिया 




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